पदोन्नति में भेदभाव क्यों ? पूर्व सेवा के आधार पर क्रमोन्नति, पदोन्नति की मांग-छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन


राजनांदगांव । शिक्षाकर्मी से स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन के पश्चात शिक्षक एलबी संवर्ग बने शिक्षकों की समस्या खत्म होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है ,शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद भी शिक्षा विभाग द्वारा सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। 

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक विनोद गुप्ता, प्रदेश महामंत्री शैलेन्द्र यदु, प्रदेश सहसचिव बाबूलाल लाडे, जिला अध्यक्ष गोपी वर्मा, जिला उपाध्यक्ष ब्रिजेश वर्मा,चन्द्रिका यादव,जिला सचिव जीवन वर्मा, जिला कोषाध्यक्ष हंस मेश्राम, मिडिया प्रभारी व प्रवक्ता देवेन्द्र साहू ने कहा है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में जिले के शिक्षकों में पदोन्नति-क्रमोन्नति की मांग सोशल मीडिया में जोर पकड़ता जा रहा है। शिक्षकगण इस अभियान में लगातार सहभागी बन रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से शिक्षक, मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर शिक्षकीय सेवा के आधार पर पदोन्नति-क्रमोन्नति की मांग कर रहे हैं। 

राजनांदगांव के जिलाध्यक्ष गोपी वर्मा ने कहा है कि सभी विभाग में पदोन्नति जारी है, तो शिक्षा विभाग में पदोन्नति क्यों नही? हजारों शिक्षक संवर्ग को 23 वर्ष की शिक्षकीय सेवा में भी क्रमोन्नति नहीं दी गई है। 1998 से लगातार भर्ती किए गए हजारों शिक्षाकर्मियों को आज तक क्रमोन्नति व पदोन्नति नहीं मिली। एक ही पद पर 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर क्रमोन्नति का प्रावधान है, किंतु नियम कायदे के चक्कर में विभाग ने शोषण ही किया है। 



प्रदेश संयोजक विनोद गुप्ता ने कहा है कि 1998 से अब तक शासकीय शाला में ही शिक्षक सेवारत है। उनकी पुरानी सेवा को आधार बनाकर ही संविलियन किया गया है। ऐसे में उस सेवा व अनुभव को आधार बनाकर शिक्षा विभाग में पदोन्नति व क्रमोन्नति क्यों नही दिया जाए?  शिक्षा विभाग के नया भर्ती नियम 2019 में कई संशोधन का सुझाव दिया गया, किंतु विभाग ने इसे दरकिनार करते हुए नियम बनाया है। इससे एलबी संवर्ग को क्रमोन्नति व पदोन्नति में अधिकारी बाधा बना रहे हैं। इस नियम में एलबी संवर्ग से भेदभाव किया गया है। संख्या के अनुपात में पदोन्नति के पद नहीं दिए गए हैं और पुरानी सेवा की वरिष्ठता भी नहीं गई है।

एसोसिएशन के जिला उपाध्यक्ष ब्रिजेश वर्मा,चन्द्रिका यादव, जिला सचिव जीवन वर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग को पूरे समर्पण से सेवा देने वाले शिक्षक संवर्ग के पदोन्नति, क्रमोन्नति के विषय मे कैलेंडर बनाकर लाभ प्रदान करने की जिम्मेदारी विभाग की है। शिक्षक संवर्ग लगातार पदोन्नति, क्रमोन्नति की मांग कर रहे है किन्तु विभागीय नियम, निर्देश व प्रक्रिया के अभाव में शिक्षक इस लाभ से वंचित है।

लगभग 46 हजार पद है रिक्त -


शिक्षा विभाग में लगभग 46 हजार पद रिक्त है, प्राथमिक शाला प्रधान पाठक के 22 हजार, मिडिल प्रधान पाठक के 6 हजार, व्याख्याता के 10 हजार, शिक्षक के 08 हजार पद पदोन्नति हेतु रिक्त है, साथ ही प्राचार्य के पद की गणना शेष है, इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि 22 हजार प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक का पद 14 वर्ष से रिक्त है। शिक्षा विभाग में भर्ती व पदोन्नति नियम 2019 में, पदोन्नति हेतु 5 वर्ष की सेवा अनुभव का प्रावधान किया गया है। 

एलबी संवर्ग के शिक्षकों का शिक्षकीय सेवा अनुभव 22 वर्ष तक का है, शिक्षकीय सेवा के आधार पर प्रदेश के हजारो रिक्त पदों की पूर्ति किया जाए। छत्तीसगढ़ शासन में शोषण की यह पराकाष्ठा ही है कि 22 वर्ष की शिक्षकीय सेवा के बाद भी हजारो एल बी संवर्ग के शिक्षक पदोन्नति, क्रमोन्नति से वंचित है। 

वर्तमान में शिक्षा विभाग में 10 वर्ष की सेवा पश्चात क्रमोन्नति का प्रावधान है, सरकार ने अपने जनघोषणा पत्र में पदोन्नति से वंचित एल बी संवर्ग के शिक्षकों को क्रमोन्नति देने का वादा किया है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने है कि प्रथम नियुक्ति के आधार पर सेवाकाल की गणना कर 10 वर्ष पूर्ण करने वाले शिक्षको को क्रमोन्नति दिया जाए। शिक्षकीय सेवा के आधार पर एलबी संवर्ग के शिक्षकों को पदोन्नत्ति व क्रमोन्नति देने के लिए शिक्षा विभाग को तत्काल निर्णय लेना चाहिए।

शिक्षक एलबी संवर्ग को पात्रता के बाद भी पदोन्नति-क्रमोन्नति का लाभ नहीं -


छग टीचर्स एसोसिएशन के जिला प्रवक्ता व मीडिया प्रभारी देवेन्द्र साहू ने बताया कि जिले के लगभग छ: हज़ार दो सौ पैतालीस शिक्षक एलबी संवर्ग को पात्रता के बाद भी पदोन्नति-क्रमोन्नति का लाभ नहीं मिल रहा है, जिससे वे हतोत्साहित हो रहे हैं। कई शिक्षक तो ऐसे हैं जो विगत 22 वर्षों से एक ही पद पर कार्य कर रहे हैं, उनको न तो पदोन्नति दी जा रही है और न ही क्रमोन्नति। ऐसा भी नहीं है कि पदोन्नति के लिए पद न हो, इसके लिए जिले में सैकड़ो पद रिक्त हैं। 

प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक तथा प्राचार्य का पद है रिक्त -

शिक्षा विभाग के स्कूलों में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक तथा प्राचार्य का पद केवल पदोन्नति से ही भरा जा सकता है, इन पदों पर सीधी भर्ती का प्रावधान नहीं है। इसके साथ ही प्राथमिक प्रधान पाठक के रिक्त पदों को केवल ई.एलबी संवर्ग के सहायक शिक्षकों से ही भरा जा सकता है, क्योंकि जिले में ई. संवर्ग के सहायक शिक्षक नहीं हैं। पदोन्नति कर्मचारियों को श्रेष्ठ कार्य करने प्रोत्साहित करता है, साथ ही कर्मचारियों के मनोबल बढ़ाने में पदोन्नति का महत्व है। 

पदोन्नति नहीं मिलने पर क्रमोन्नति का प्रावधान-


यह बात सत्य है कि सभी कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं दी जा सकती है तो कर्मचारियों के लिए क्रमोन्नति का प्रावधान किया गया है, क्रमोन्नति में कर्मचारी का वेतन बढ़ जाता है लेकिन पद वही रहता है। स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती व पदोन्नति नियमों के अनुसार पांच साल के शिक्षकीय सेवा के आधार पर पदोन्नति का प्रावधान है, साथ ही पदोन्नति नहीं मिलने पर दस साल की सेवा पर क्रमोन्नति का नियम है।

वेतन विसंगति दूर करने पदोन्नति-क्रमोन्नति आवश्यक-

एसोसिएशन के जिला पदाधिकारी हंस मेश्राम,मनोज वर्मा अनिल शर्मा ने बताया कि शिक्षक संवर्ग लंबे समय से वेतन विसंगति का शिकार है, चाहे सहायक शिक्षक या शिक्षक या फिर व्याख्याता। हर वर्ग के वेतन निर्धारण में विभागीय पेंच लगा दिया गया, जिसके कारण वेतन विसंगति से सभी वर्ग पीड़ित हैं. वेतन विसंगति को दूर करने का एक महत्वपूर्ण रास्ता पदोन्नति-क्रमोन्नति है।

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