11 वर्षों के सेवा के बाद nps के तहत 1984 रूपये पेंशन......

nps ने एक और शिक्षक पर कहर बरपाया, 11 वर्षों तक पूरी ईमानदारी से सेवा देने के बाद सेवानिवृत्ति पर निर्धारित हुआ 1984 रुपये पेंशन ,इस खबर को पढ़ने के बाद शायद कुछ पल के लिए आपको भी यकीन न हो ,परन्तु यह खबर आपको हिला कर रख देगी | जी हाँ , यह खबर nps पेंशन धारकों के लिए आँख खोलकर रख देने वाली हैं |



कोई भी शासकीय सेवक अपने जीवन का 20 -30 साल सेवा देने के बाद चाहता है कि सेवानिवृत्ति के बाद का उसका जीवन सुख से कटे ,शायद इसी लिए वे निश्चिन्त होकर नौकरी में अपना बेहतर से बेहतर सेवा प्रदान करता है ,परन्तु nps ने लाखों अधिकारी /कर्मचारी को सकते में डाल दिया है | हर किसी को अब यह डर सताने लगा है कि क्या nps सेवानिवृत्ति के बाद उनको भी दर -दर की ठोकरें खाने पर मजबूर तो नही कर देगा |


यह कहानी जुलाई 2019 में सेवानिवृत्त हुए अध्यापक है | उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग में शकराश्रम इंटरमिडीएट कालेज सिखड़ ब्लाक से सेवानिवृत्त हुए रामयज्ञ यादव को 11 वर्षों के सेवा के बाद 1984 रुपये पेंशन निर्धारित हुआ है | हालाँकि मामला उत्तर प्रदेश है ,परन्तु देश के अन्य राज्यों में भी यही स्थिति है |

प्राप्त जानकारी के अनुसार रामयज्ञ यादव 2008 से 2019 तक कुल 11 वर्ष शासकीय सेवक के रूप में सेवा दिए हैं ,वहीं रिटायरमेंट के समय उनकी सैलरी 70 हजार रूपये थी | पुरे सेवा काल में यादव जी का nps की राशि 691670 रूपये जमा हो पाया था |रिटायरमेंट पर nps में जमा राशि का 60 प्रतिशत याने 414882 रूपये उन्हें नगद भुगतान किया गया है ,वहीं 40 प्रतिशत राशि 276588 रूपये पर पेंशन निर्धारित किया गया है |


यह कैसा इंसाफ -


जीवन का अमूल्य 11 साल देने के बाद भी यदि सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन ठोकरे खाते हुए गुजरता है तो यह वाकई में चिंताजनक है | nps पेंशन बुढ़ापे में ठोकरें खाने को मजबूर कर रही है | 11 वर्षों तक पूरी ईमानदारी से सेवा देने के बाद यदि गुरु प्रसाद देवांगन जी को 549 रूपये पेंशन मिलता है तो nps खाता धारकों के वाकई में बहुत ही चिंताजनक बात है |

shikshaklbnews में बहुत पहले एक खबर प्रकाशित हुआ था ,जिसमे कर्मचारी का वेतन 70000 हजार और nps के तहत पेंशन मिला 700 रूपये ,चूँकि यह मामला भी उत्तर प्रदेश का था ,इस लिए इस पर किसी का ध्यान नही गया ,परन्तु अब प्रदेश में भी nps का कहर जारी हो चूका है |

कोई भी कर्मचारी अपने वेतन से पेंशन के लिए राशि कटता देखकर यही सोचता है कि सेवानिवृत्ति के बाद यही राशि पेंशन के रुप में उनके सेवानिवृत्ति के बाद बुढ़ापे का लाठी का सहारा बनेगा ,परन्तु nps बुढ़ापे का लाठी छिनने का काम कर रही है | यह कैसा इंसाफ है क्या nps धारकों का रिटायर्मेंट के बाद यही हश्र होने वाला है |

छत्तीसगढ़ में भी nps बरपा रहा है कहर -


बिलासपुर जिले के बिल्हा विकास खंड के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला बुन्देला ,संकुल केंद्र -सेवार में पदस्थ श्री गुरु प्रसाद देवांगन जुलाई 2020 में सेवानिवृत हुए थे ,जिनकों nps के तहत 549 रूपये पेंशन मिलना है  | प्राप्त जानकारी के अनुसार शिक्षक गुरु प्रसाद देवांगन का नियुक्ति जुलाई 2009 में हुआ था ,11 वर्षो के सेवा के बाद जुलाई 2020 में सेवानिवृत्त हुए हैं |

इससे पहले भी विकास खंड बिल्हा में पदस्थ शिक्षिका श्रीमती किरण सिंह को 22 वर्षों के सेवा के बाद सेवानिवृत्ति पर 1171 रूपये पेंशन निर्धारित हुआ है |अब शासकीय प्राथमिक शाला बुन्देला ,संकुल केंद्र -सेवार ,विकास खंड -बिल्हा में पदस्थ श्री गुरु प्रसाद देवांगन जी को भी nps के तहत 549 रूपये पेंशन मिलना है | 

वहीं कबीरधाम जिले के एल.बी. संवर्ग के प्रथम सेवानिवृत्त शासकीय व्याख्याता का पेंशन मात्र 599 रुपये निर्धारित हुआ था, जिले के बोड़ला विकासखण्ड अंतर्गत स्थित शासकीय हाई स्कूल मिनमिनिया मैदान में पदस्थ रही श्रीमती वनमाला खापर्डे की नियुक्ति सन 1999 में शिक्षाकर्मी के रूप में हुआ, जिनका संविलियन एक जुलाई 2018 को स्कूल शिक्षा विभाग में एल.बी. संवर्ग के व्याख्याता के पद पर किया गया था।

शासकीयकरण के बाद जून 2019 में 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर सेवानिवृत्त किया गया. सेवानिवृत्ति के समय उनकी कुल मासिक वेतन लगभग तिरपन हजार रुपये था, जिनका मासिक पेंशन अब मात्र 599 रुपये निर्धारित हुआ है।


549 रूपये में कोई कैसे जीवन यापन कर सकता है -

राम यज्ञ यादव को 1984 रूपये पेंशन , गुरु प्रसाद देवांगन जी 549 रूपये पेंशन ,श्रीमती किरण सिंह को 1171 रूपये पेंशन ,श्रीमती वनमाला खापर्डे को 599 रूपये पेंशन , इसके अवाला nps के और अनेकों मामले सामने आ चुके हैं , जिसमें किसी भी कर्मचारी को 2 हजार रूपये से अधिक का पेंशन निर्धारित नही हुआ है | 


NPS का विरोध क्यों?



NPS के लागू होते ही इसका विरोध शुरू हो गया था जो कि लगातार जारी है। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कई संगठन भी बन चुके हैं जो NPS के स्थान पर पुरानी पेंशन बहाली के लिए संघर्षरत हैं। NPS के विरोध का मुख्य कारण है ,NPS का शेयर बाजार पर आधारित होना। NPS पूर्णतः बाजार आधारित स्किम है जो कि कर्मचारियों के  सही नहीं है। पुरानी पेंशन से कर्मचारियों को जो आर्थिक लाभ मिलता था ,वह सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त होता था ,परन्तु nps के तहत मिलने वाली पेंशन नही के बराबर है |

पुरानी पेंशन क्यों है जरूरी -

नवीन पेंशन प्राप्त अधिकारी /कर्मचारियों के अनुसार नवीन पेंशन बाजार आधारित प्लान है। नवीन पेंशन में रिटायरमेंट जो बाद जो राशि मिलना है वह उस समय के शेयर मार्केट पर निर्भर करेगा ,परन्तु पुरानी पेंशन में ऐसी बात नहीं थी। 

पुरानी पेंशन, नवीन पेंशन की तुलना में कर्मचारियों के लिहाज से ज्यादा बेहतर है। पुरानी पेंशन में रिटायरमेंट में मिलने वाली राशि की गारंटी होती थी ,परन्तु नवीन पेंशन में रिटायरमेंट में आपको कितनी राशि मिलनी है यह उस समय का बाजार तय करेगा।

 NOPRUF ने ये कहा -


NOPRUF ने शासन से पूछा है कि कोई कर्मचारी 1984 रूपये में अपने परिवार का भरण -पोषण कैसे कर सकता है |  NOPRUF के राष्ट्रिय अध्यक्ष ने कहा है कि हम पुरानी पेंशन बहाली को लेकर रात -दिन लगे हुए हैं ,जरुर हमको कामयाबी मिलेगी| 


क्या आप nps पेंशन स्कीम धारी शासकीय सेवक हैं ,यदि हाँ तो इस खबर को अधिक से अधिक शेयर जरुर करें ,क्या आप भी nps को लेकर चिंतित हैं ,यदि हाँ तो अपनी प्रतिक्रिया कमेन्ट बॉक्स में लिखकर हमें साझा जरुर करें ,हो सकता है आपके कमेन्ट से अन्य nps धारको को इससे होने वाले नुकसान का अंदाजा हो और पुरानी पेंशन की मांग के मुहीम को एक नई दिशा मिले |

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1 Comments

  1. शासन को इस बात पर सह्रदयता पूर्वक चिंतन करने की आवश्यकता है जिससे एक सर्वसमर्थ लोकतंत्र बनी रहे विचार करें कि क्या कर्मचारी देश का भविष्य है या नहीं

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