क्रमोन्नति मामले में हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान

 भारतीय संविधान का एक अनुच्छेद ऐसा है जो किसी के साथ हो रहे अहित को रोकने का कार्य करता है ,वह अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार। शिक्षाकर्मी /शिक्षक एलबी संवर्ग के शिक्षक भी नियमित शिक्षकों की तरह एक शिक्षक ही हैं ,वे भी शाला और बच्चों के लिए उतने ही मेहनत करते हैं ,जितने की एक नियमित शिक्षक ,परन्तु पदोन्नति /क्रमोन्नति के लिए सात वर्ष का नियम होने के बाद भी आज तक उन्हें पदोन्नति /क्रमोन्नति नहीं दिया जा रहा है। 


सहायक शिक्षक एलबी की क्रमोन्नति मामले में माननीय उच्च न्यायलय द्वारा संज्ञान लेते हुए श्री साजिद कुरैशी विकासखंड अध्यक्ष अपाक्स द्वारा दायर याचिका क्रमांक 1021/2021 में सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ शासन से जवाब माँगा है और साथ ही सीईओ जनपद पंचायत बागबाहरा को नोटिस जारी किया है। 

दरअसल विकासखंड अध्यक्ष अपाक्स बागबाहरा साजिद कुरैशी सहायक शिक्षक के रूप में कार्यरत है , वह शिक्षाकर्मी और सहायक शिक्षक एलबी के रूप में पिछले 15 वर्षों से कार्यरत है। दिनांक 13.07.2020 को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पत्र जारी कर साजिद कुरैशी को जुलाई 2020 से क्रमोन्नत वेतनमान के आधार पर वेतन जारी करने का आदेश विकास खंड शिक्षा अधिकारी को आदेशित किया था। 

साजिद खान द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश के बाद भी क्रमोन्नत वेतन प्राप्त न होने पर डब्ल्यू .पी.एस. 4715/2020 दायर किया था ,जिस पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा विकास खंड शिक्षा अधिकारी बागबाहरा को 60 दिनों के अंदर क्रमोन्नत वेतनमान जारी करने का आदेश दिया था |

मुख्य कार्यपालन अधिकारी बागबाहरा द्वारा दिनांक 27.01.2021 को आदेश जारी कर श्री कुरैशी को क्रमोन्नत वेतमान देने से मना कर दिया है और यह दलील दिया गया कि साजिद कुरैशी को क्रमोन्नत वेतनमान इस लिए नही दिया जा सकता क्योंकि उक्त कर्मचारी का संविलियन 1 जुलाई 2018 को स्कूल शिक्षा विभाग में हो चूका है |

मुख्य कार्यपालन अधिकारी के इस आदेश को साजिद कुरैशी द्वारा अपने अधिवक्ता वकार नैय्यर के माध्यम से डब्ल्यू .पी.एस. 1021 /2021 के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दिया गया है। मामले की सुनवाई करते हुए उच्च  न्यायालय द्वारा शासन से जवाब माँगा गया है। 

ये कहना है साजिद कुरैशी का -

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार प्रदान करती है | समानता के अधिकार के तहत जो भी शिक्षाकर्मी छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत पंचायत या नगरीय निकाय में कार्य किये हैं ,उनके पूर्व पद में किये गये सेवा का गणना किया जाना चाहिए ताकि समानता के आधार पर हम सभी शिक्षकों को क्रमोन्नत वेतमान मिल सके |

वहीं पूर्व पद के गणना को लेकर विभाग का तो टूक -

स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि संविलियन के बाद पूर्व पद की गणना और तत्कालिक लाभ को लेकर न्यायालय जाने वाले शिक्षकों को पूर्व पद का कोई लाभ नही मिलेगा | स्कुल शिक्षा विभाग ने कहा है कि आपकी सेवा से उसी दिन से मानी जाएगी ,जिस दिन से आपका स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन हुआ है |

स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव श्री जनक कुमार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि जिन शिक्षकों का संविलियन 1 जुलाई 2018 को स्कूल शिक्षा विभाग में हुआ है , उनका उसी तिथि से गणना करके समस्त लाभ दिया जायेगा | पूर्व पद का कोई लाभ नही दिया जायेगा |

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