मांगों से भटकता शिक्षक संघ और आरोप -प्रत्यारोप


प्रदेश में शिक्षक एलबी संवर्ग के संघों की बात करें तो नित नये -नये सन्गठन बनते जा रहे हैं ,इसके साथ ही संगठनों का आपसी तकरार भी बढ़ते जा रहा है | शिक्षक संगठन आम शिक्षकों के हित को ध्यान में रखते हुए अस्तित्व में आये हैं ,परन्तु जिस प्रकार संघों का आपसी टकराव उभर कर सामने आ रहा है ,लगता है सन्घठन एक दुसरे को नीचा दिखाने के लिए ही बनाये गये हैं |


आये दिन शिक्षक संघों का जिस प्रकार एक दुसरे के प्रति प्रतिक्रिया आ रही है  ,आम शिक्षक मांगों को छोड़ इसी बात पे उलझे हुए है कि कौन सा संघ सहीं है ? किस संघ पर विश्वास करें ? शिक्षक एलबी न्यूज़ टीम ने वर्तमान में संघों के गतिविधियों को लेकर आम शिक्षकों की प्रतिक्रिया जानने का प्रयास किया |

आम शिक्षकों का संघों को लेकर जो प्रतिक्रिया मिला वह शिक्षक संघों के लिए अच्छी खबर नही है , क्योंकि ज्यादातर शिक्षक ,संघों के गतिविधियों से ज्यादा खुश नही हैं | शिक्षकों का कहना है कि जब सभी संघ कहते हैं ,शिक्षक हित ही उनका मुख्य लक्ष्य है तो फिर एक बैनर तले आने से कौन रोक रहा है |शिक्षक संगठनों को आपस मे कम्पीटिशन करना छोड़ मांगों पर ध्यान देना चाहिए ।

आम शिक्षको का संघों पर से उठता विश्वास -

ऐसा नही है कि आम शिक्षक संगठनों के आरोप -प्रत्यारोप को नही समझ रहे है , जिस प्रकार संघ आपस में एक दुसरे से प्रतिस्पर्धा में लगे हैं आम शिक्षक भलीभांति समझ रहा है |शायद यही कारण है कि किसी भी संघ के हड़ताल में उतनी भीड़ देखने को नही मिल रही है ,जिनता होना चाहिए |

शिक्षक संगठनों को इस सम्बन्ध में शायद समीक्षा करने की आवश्यकता है | संघों का आपसी छींटाकसी कहीं न कहीं ,मांगों को प्रभावित कर रही है | सभी शिक्षक संघ इस बात को भलीभांति जानते हैं ,फिर भी स्वार्थ के कारण मांगों को ध्यान देने के बजाय एक दुसरे से तुलना करते नजर आ रहे हैं |

आरोप -प्रत्यारोप का दौर चरम सीमा पर -

पिछले कुछ दिनों संगठनों का आपसी तालमेल पूरी तरह से बिगड़ चूका है | एक सन्गठन दुसरे सन्गठन को लेकर ऐसे -ऐसे प्रतिक्रियाएं दे रहें मानों उनकी लड़ाई सरकार से न होकर संगठनों से है | प्रत्येक सन्गठन अपने को शिक्षक हितैषी बताने में लगे हैं | कोई संघ किसी को अपने संघ से छोटा बता रहा है तो कोई संघ दुसरे संघ के हड़ताल में कम उपस्थिति पर हंस रहा है | 

वर्तमान में संघों के एक दुसरे के प्रति प्रतिक्रिया को देखकर ऐसा लगने लगा है मानों दुसरे संघ को नीचा दिखाने पर ही मांग पूरा होगा |  

मांगों से भटक अपने को शिक्षक हितैषी बताने में लगे संघ  -

यदि शिक्षक एलबी संवर्ग के विभिन्न संघों की बता करें तो वर्तमान में शासन के निर्णय पर प्रतिक्रिया से ज्यादा आपसी क्रियाकलाप को लेकर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है | प्रत्येक सन्गठन दुसरे संघ को गलत बताता है और अपने को शिक्षकों के हित के लिए लड़ने वाला बताता है | 

सदस्यता एप बना शक्ति प्रदर्शन का जरिया -

प्रदेश में जितने भी शिक्षक संघ हैं सबका सदस्यता एप (कुटुंब ) व्हाट्सएप ग्रुपों में घुम रहा है , सदस्यता अभियान चलाना अच्छी बात है ,परन्तु यह एप शक्ति प्रदर्शन का जरिया बन चूका है ,यदि शक्ति प्रदर्शन शासन के खिलाफ होता तो सहीं था ,परन्तु शिक्षक संघ मानों अन्य संघों को ही सरकार समझ बैठे हैं |

आपस का टकराव मांगों को प्रभावित कर रहा है संघों को आपस में प्रतिस्पर्धा करने के बजाय आम शिक्षकों के हितों पर ध्यान देने की आवश्यकता है | 

2012 में हुए एकजुटता का परिमाण सब देख ही चुके हैं -

2012 में सभी संगठनों द्वारा एकता का परिचय देते हुए किये गये 38 दिन की हड़ताल का नतीजा तो सभी देख ही चुके हैं | प्रदेश में शिक्षाकर्मी प्रथा का अंत हो गया | शिक्षाकर्मियों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन  2012 में हुए हड़ताल का ही परिणाम है |

शिक्षक संगठनों को समझना होगा कि शिक्षाकर्मी से शिक्षक बनना सभी संघों के संयुक्त प्रयास का नतीजा है तो फिर अकेले चल कर क्या किसी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है | जिस प्रकार 2012 में स्व पहल से सभी संगठन एकजुट हुए थे और एक विशाल भीड़ शासन को हिलाकर रख दिए थे ,ठीक वैसे ही स्व पहल की आवश्यकता है | 

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